प्यार में PARTNER के SUCCESS की सीढ़ियां बने, बाधाओं की दीवार नहीं

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मोनिका अग्रवाल:

हम अक्सर अपने Partner को बहुत प्यार करने का दावा करते हैं और उसके Success की कामना करते हैं, लेकिन असल प्यार सिर्फ किस्से कहानियों में ही होता है. असल जिंदगी में, उमर के हर पड़ाव में, प्यार का मतलब और जरूरत बदल जाती है.




टीनएज का प्यार ज्यादातर लव एट फर्स्ट  साइट होता है. इस समय तमन्नाएं बहुत जल्दी करवट लेती हैं और इस उम्र का प्यार टाइम पास के लिए शुरू होता है और समय गुजारने के साथ खत्म भी हो जाता है.

फिर उम्र के साथ जब हम परिपक्व होने लगते हैं तो उस समय प्यार में गंभीरता आ जाती है. ऐसे ही समय यदि प्यार करने वाला साथी यदि सही मार्ग दर्शक हो तो आदमी सफलता की बुलंदियों तक पहुंच सकता है. यह जरुर सोचना चाहिए कि हम अपने Partner के लिए Success की सीढी है या बाधाओं की दीवार




आईए देखते हैं कि यदि Partner सही मिल जाए तो इंसान में किस-किस तरह के बदलाव आ सकते हैं…

1- ड्रेसिंग सेंस

अमन कही भी जाता अपने कपड़ों के बारे में कभी नहीं सोचता.  इस कारण लोगों की नजर में उसकी कोई अहमियत नहीं थी लेकिन रूचि से जब उसे प्यार हुआ, तो उसका ख्याल रखने लगा, क्योंकि रुचि को समय और मौसम के अनुसार कपड़े पहनने की आदत थी.




अमन रूचि की वजह से ठीक से तैयार होने लगा. जब किसी से प्यार होता है तो इंसान अपने ऊपर ज्यादा ध्यान देने लगता है. अपने महबूब की एक तारीफ भरी निगाह के लिए उसकी ड्रेसिंग सेंस अच्छी हो जाती है.

2- केयरिंग नेचर

सार्थक की मम्मी जब भी कोई काम  कहती, वह टाल जाता लेकिन जब से सानिया उसकी जिंदगी में आई उसका केयरिंग नेचर देखकर सार्थक भी अपनी मम्मी की बातों का आदर करने लगा. सानिया से मिलने के बाद सार्थक में जिम्मेदारी की भावना आयी.

3-समझदारी

Success
मोनिका अग्रवाल

सारांश को अपने पिता के बिजनेस में हाथ बटाना एक बोझ की तरह लगता था. वह सारा दिन दोस्तों के साथ घूमने फिरने मस्ती में गुजार देता पर अमिता से शादी होने के बाद सारांश  की यह आदत छूट गई.

फिर अमीषा की मौजूदगी ने उसे जिम्मेदारी का एहसास दिलाना शुरू किया. अमीषा ने सारांश को पिता की बढ़ती उम्र और उनकी परेशानी के बारे में बताया तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने अपने पिता की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली.

सारांश के माता पिता को अपनी बहू के ऊपर गर्व होता है जिसने उसने प्यार और समझदारी से सारांश को  जिंदगी की ओर लौटाया.

सच्चे और निस्वार्थ प्यार में इतनी ताकत होती है कि राह से भटके हुए इंसान को कामयाबी के शिखर तक ले जाती है है, लेकिन शादी के बाद अगर ऐसा जीवन साथी मिल जाए  जिसके लिए प्यार शब्द का मतलब पैसा हो या अपने इशारों पर नचाना हो? तो शायद  इंसान हर मामले में पिछड़ जाता है.

प्यार के नाम पर किसी की भावनाओं से खेलना यह किसी की जान लेने जैसा है. जिससे प्यार होता है उसे दुनिया की हर खुशी देने की इच्छा होती है और खुशियां छीनने की नहीं.

अपने साथी को ऐसा प्यार दे तो उसकी कामयाबी की सीढ़ी बने. कभी जो उसके सामने कोई रुकावट आए ,कभी मुश्किलों से घबराए और थकने लगे तो आंखें बंद करते ही आपका प्यार, आपका साथ उसमें नई ऊर्जा का संचार कर इतनी ताकत भर दे कि, रुकावटों की जंजीर तोड़कर वह शिखर तक जा पहुंचे.

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