काम की बात-क्यों PLASTIC की तरह खिंचता है आंटा?

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Plastic
Because of gluten protein wheat flour stretches like plastic string

आजकल सोशल मीडिया पर इस बात की बहुत चर्चा हो रही है और वीडियो वायरल हो रहा है कि आंटे में Plastic मिलाया जा रहा है इसलिए यह गूंथने के बाद खिंचता है. आंटे में प्लास्टिक मिलाने के आरोप लग रहे हैं जिसे विशेषज्ञों और कंपनियों ने ग़लत बताया है.

ग्राहकों की शिकायत के बाद दिल्ली समेत कई जगहों पर छापे भी मारे गए हैं और आंटे के सैंपल लिए गए हैं. जिन ब्रांड्स के बारे में लोग सबसे ज्यादा शिकायत कर रहे हैं उनमें आशीर्वाद और शक्तिभोग प्रमुख है. विशेषज्ञों और कंपनियों ने इन आरोपों को निराधार बताया है.




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आशीर्वाद ब्रांड का आंटा बनाने वाली कंपनी आईटीसी के फूड बिजनेस के प्रमुख हेमंत मलिक ने बताया कि गेहूं में प्राकृतिक रुप से Gluten नाम का प्रोटीन पाया जाता है. फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई का नियम है कि आंटे में कम से कम 6फीसदी ग्लूटेन होना चाहिए.

माइक्रोकेम सिलिकर की दिसंबर की एक लैब रिपोर्ट बताती है कि आशीर्वाद आंटे में 10.4%, पिल्सबरी में 9%, सिल्वर कॉइन में 9.7 % और पतंजलि ब्रांड के आंटे में 10.3% ग्लूटेन है. हेमंत ने बताया कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो कंटेट के खिलाफ बेंगलुरु और हैदराबाद में शिकायतें दर्ज कराई गई है.




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उन्होंने कहा कि आंटे में प्लास्टिक मिलाने की बात इसलिए भी बेतुकी है क्योंकि आंटा 25-30 रुपए किलो मिलता है और प्लास्टिक के दाम 100 रुपए किलो से भी ज्यादा है.




भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के पूर्व डाइरेक्टर जे पी टंडन ने भी इन खबरों को गलत बताया है. उन्होंने कह ाकि पानी मिलाने पर ग्लूटेन के कारण ही आटे की लोई बनती है, जिसे हम बेल कर रोटी बनाते हैं. अच्छी क्वालिटी के आटे में 8-10%  ग्लूटेन होता है. उन्होंने कहा कि अगर आंटे में ग्लूेटन नहीं बनता है तो इसका मतलब है कि गेहूं खराब है.

(साभार-दैनिक भास्कर)

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