FEMINISM के खिलाफ कैसे हो सकता है संजना-संवरना?

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Feminism
Shaban Azmi, Twinkle Khanna , Nandita Das

प्रितपाल कौर:

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका:

किसी भी Feminist की चाह होती है कि महिलाओं को भी पुरुषों के सामान ही आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक अधिकार मिलें. जो कि हमारे पितृ-सत्तात्मक समाज में फिलहाल नहीं हैं. लेकिन कुछ लोग Feminism की इस मूल विचार-धारा को समझे बिना एक नयी और विकृत विचार-धारा के वाहक बन जाते हैं जिसके तहत मेकअप करना, फैशन के अनुरूप कपड़े पहनना या ग्लैमरस दिखना अथवा इनके बारे में लिखना-पढ़ना भी अपराध की श्रेणी में आता है. यह बेहद दुखद बात है.  




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प्रितपाल कौर, वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका

दरअसल अंग्रेज़ी में एक शब्द है. .. Presentable… जिसका अर्थ होता है जो देखने में भला, आकर्षक और सुन्दर लगना. ये शब्द महिलाओं और पुरुष दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यानी हम जब दूसरों के सामने आते हैं तो हमें अपने आत्म सम्मान और सामने वाले को सम्मान देने के लिए उचित तरीके से खुद को साफ़ सुथरा और सभी तरीके से अच्छी पोशाक पहन कर प्रस्तुत होना चाहिए. 

आज के प्रतिस्पर्धा वाले ज़माने में तो बहुत से व्यवसाय ही ऐसे हैं जिनमें Presentable दिखाई देना पहली शर्त होती है. बाकी योग्यता उसके बाद आंकी जाती है. और यह बाकी की योग्यता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है. लेकिन इसका मतलब यह न समझें कि सिर्फ अच्छा दिखने भर से आपकी योग्यता का पैमाना पूरा भर गया है.

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अच्छा दिखने के बाद आपको अपनी योग्यता और अपनी स्किल्स का भी भरपूर इस्तेमाल करना होता है और अपने आस पास के लोगों को उससे प्रभावित करना होता है.  वो आपका बॉस हो सकता है, सहकर्मी हो सकते हैं, ग्राहक हो सकते हैं या कि आपके घर के सदस्य भी.




क्या कोई भी कभी चाहेगा कि वह अच्छा न दिखे या स्वस्थ न हो या कुरूप लगे? जी नहीं. तो फिर ये सोच कि खुद को संवारना, या सजाना किसी ख़ास किस्म के लोगों के लिए है हमारी भूल होगी. ये बात बिलकुल बेमानी है.

हर इन्सान एक भीतर एक नैसर्गिक चाह होती है अच्छा दिखने की. सभी अलग अलग तरीकों से ये इच्छा पूरी करते हैं. ख़ास बात ये है कि जब आप अच्छा दिखते हैं तो अच्छा महसूस भी करते हैं. आप का आत्म-सम्मान कई दर्जा बढ़ जाता है. आप अपने काम बेहतर तरीके से करते हैं. 

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इसके अलावा कुछ रिश्ते भी ऐसे होते हैं जिनमें एक दूसरे को सुन्दर रूप में देखना दोनों की ही अच्छा लगता है.जैसे कि पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका का रिश्ता या फिर मां और बच्चों का रिश्ता. हर मां हमेशा  अपने बच्चों को सजा संवार कर रखती है. बच्चे भी अपनी मां को सजा संवरा देखना पसंद करते हैं.




कोई महिला खूब सारा मेकअप करके खुद को बेहतर महसूस करती है तो कोई महिला सिर्फ अच्छी सी क्रीम लगा कर आँखों में काजल और एक लिपस्टिक से ही बेहद आत्म विशवास से भर उठती है. आज कल तो पुरुष भी इस क्षेत्र में महिलाओं को जम कर टक्कर दे रहे हैं. वे ब्यूटी ट्रीटमेंट करवाते हैं. डिज़ाइनर और ब्रांडेड कपडे पहनते हैं. यहां तक कि अब कुछ पुरुष गहने भी पहनने लगे हैं.

तो अगली बार जब आप किसी महिला या पुरुष को बना ठना देखें तो या किसी को इस पर लिखता-पढ़ता देखें  तो यह नहीं समझें कि वह समाज के विरुद्ध कोई काम करे रहे हैं. बल्कि वे तो एक खूबसूरत तरीके से समाज की मुख्य-धारा में आत्मसात हो रहे हैं.

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