जिंदगी में HAPPY रहना बहुत कठिन है क्या?

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अंशुमन आनंद:

खुश रहना यानी Happy रहना बहुत कठिन तो नहीं… एक संत से एक युवक ने पूछा “गुरुदेव, हमेशा खुश रहने का नुस्खा अगर हो तो दीजिए. संत बोले बिल्कुल है, आज तुमको वह राज बताता हूं.

संत उसे अपने साथ सैर को ले चले, अच्छी बातें करते रहे. युवक बड़ा आनंदित था. एक स्थान पर उन्होंने एक बड़ा पत्थर देकर कहा- इसे उठाए साथ चलो. कुछ समय तक तो वह युवक आराम से चला.




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थोड़ी देर में हाथ में दर्द होने लगा पर दर्द सहन करता चुपचाप चलता रहा. संत पहले की तरह मधुर उपदेश देते चल रहे थे पर युवक का धैर्य जवाब दे गया.

उसने कहा- गुरूजी आपके प्रवचन मुझे प्रिय नहीं लग रहे अब, मेरा हाथ दर्द से फटा जा रहा है. संत ने युवक को पत्थर पत्थर रखने का संकेत दिया. यह संकेत मिला तो युवक ने उसे फेंका और आनंद में भरकर गहरी सांसे लेने लगा.




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संत ने कहा- यही है खुश रहने का राज़. मेरे प्रवचन तुम्हें तभी आनंदित करते रहे जब तुम बोझ से मुक्त थे. बोझ ने आनंद छीन लिया. जैसे पत्थर को ज़्यादा देर उठाये रखेंगे तो दर्द बढ़ता जायेगा उसी तरह हम दुखों या किसी की कही कड़वी बात के बोझ को जितनी देर तक उठाये रखेंगे उतना ही दुःख होगा.

अगर खुश रहना चाहते हो तो दु:ख रुपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लो और हो सके तो उसे उठाओ ही नहीं. युवक की समझ में आ गया था कि उसे आगे की जिंदगी किस तरह व्यतीत करना है.




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